अपने लड़के को भी लड़की की तरह पाला है इन लोगों नें। मुझे इस घर से बे-रोक-टोक या थोड़ी मगर अतिरिक्त से कहीं ज़्यादा रोक-टोक के साथ ३ km दूर के कॉलेज भी जाने दिया गया इसे भी मैं गनीमत समझूंगा। इस सब के बाद भी मैं वो बन गया हूँ जो मैं हूँ (moderately successful “आदमी “) इसे देख कर यही कहा जाएगा की कुदरत से आप नहीं लड़ सकते। कुदरत अपना रुख लेगी, और उम्मीद है की आप बेहरहमी से रौंधे जाएंगे।
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